दशहरे का मेला आया,
खुशियों की सौगातें लाया।
बच्चे, जवान और दादाजी आए,
हँसते-गाते सब मुस्काए।
रंग-बिरंगे झूले प्यारे,
घूम रहे बच्चे न्यारे-न्यारे।
गुब्बारे और खिलौने आए,
देख-देखकर बच्चे मुस्काए।
जलेबी, लड्डू और मिठाई,
खुशबू इनकी मन को भाई।
ढोल बजे और बाजे ताशे,
नाचे बच्चे हँसते-हँसते।
देखो-देखो राम जी आए,
संग में लक्ष्मण जी भी आए।
सीता मैया साथ में आईं,
सबके मन में खुशियाँ छाईं।
हनुमान जी भी संग में आए,
जय श्री राम के नारे लगाए।
लाल ध्वजा और गदा निराली,
सूरत लगती बड़ी ही प्यारी।
ऊँचे-ऊँचे पुतले देखो,
रावण के दस सिर देखो।
कुंभकर्ण और मेघनाद,
खड़े हुए हैं बनकर विशाल।
राम जी ने धनुष उठाया,
चमचम करता तीर चलाया।
तीर लगा और आग लगी,
रावण की लंका धू-धू जली।
रावण का पुतला जलता जाए,
सबका मन हरषाता जाए।
बुराई हारी, अच्छाई जीती,
खुशियों से भर गई धरती।
बच्चे ताली खूब बजाएँ,
मिलकर जय श्री राम बुलाएँ।
सच्चाई की राह अपनाएँ,
सबसे प्यार करें, मुस्काएँ।
दशहरे का मेला प्यारा,
खुशियों से जगमग जग सारा।
राम जी का संदेश अपनाएँ,
बुराई छोड़, अच्छाई लाएँ!

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